
विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के पीजी हिन्दी विभाग में वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. सुबोध सिंह शिवगीत को विभागाध्यक्ष (एचओडी) नियुक्त किया गया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज को डॉ. शिवगीत को विभाग का प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. सुबोध सिंह शिवगीत का जन्म 19 जनवरी 1966 को हजारीबाग जिले के दमा गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा हजारीबाग तथा रांची में संपन्न हुई। वे एक प्रतिष्ठित साहित्यकार, समीक्षक और शिक्षाविद् के रूप में व्यापक पहचान रखते हैं। उनकी कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, शोध आलेख और समीक्षाएँ देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। साथ ही उनकी रचनाएँ आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों से भी प्रसारित होती रही हैं।
साहित्य जगत में डॉ. शिवगीत की महत्वपूर्ण कृतियों में ‘पूर्व की ओर’, ‘प्रपंचतंत्रम्’ (काव्य-संग्रह), ‘स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कृष्ण काव्य’ (समीक्षा ग्रंथ) तथा ‘चाक पर कुम्हार’ (कहानी-संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। वे ‘दस्तक’ काव्य-संग्रह तथा साप्ताहिक समाचार पत्र ‘हजारीबाग टाइम्स’ के संपादक भी रह चुके हैं।
डॉ. शिवगीत प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं मार्खम कॉलेज के पूर्व प्राचार्य स्वर्गीय डॉ. शिवदयाल सिंह के सुपुत्र हैं। उनका परिवार शिक्षा, साहित्य और बौद्धिक परंपराओं के लिए जाना जाता है।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें झारखंड साहित्य परिषद सम्मान, पलामू सम्मान, झारखंड राष्ट्रभाषा परिषद सम्मान (भुरकुंडा, रामगढ़), हिंदी साहित्य भारती सम्मान-2021 तथा त्रिवेणीकांत ठाकुर सम्मान-2022 प्रमुख हैं।
शिक्षा और साहित्य के साथ-साथ डॉ. शिवगीत की राजनीति पर भी गहरी पकड़ मानी जाती है। वे चुनावी राजनीति में भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज करा चुके हैं। मृदुभाषी, सहृदय और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी डॉ. शिवगीत को समाज में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो हर वर्ग के लोगों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
उनकी विभागाध्यक्ष पद पर नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों में हर्ष का वातावरण है। शिक्षाजगत और साहित्यिक समुदाय ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे हिन्दी विभाग के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम बताया है।





