चांद कर रोशनी – मनोज कुमार कपरदार

चांद कर रोशनी

आइज फेर चांद के
बदरी टाय ढांइप लेलय
ऐसन कखनो कखनो
होव हय
काइल कर बात लागय
गरम रोध टाय
मूलवासी कर
कयेक गो
जुलूस बाहराइल हलय
आशा हलय
चांद कर
कुछ हिस्सा मिलतय
लेकिन
चांद टा के
बदरी टाय ढांइप लेल हलय
चांद कर रोशनी खातिर
बदरी टा के चीरे हतक।

कवि – मनोज कुमार कपरदार

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