निसा केकरांञ हे – मालती कुमारी

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By Krishna Kunal

निसा केकरांञ हे

निसा केकरांञ हे,
केकरो सबाल हे,
केकरो जबाब हे,
केकरो मिजाइज हे,
केकरो धाक हे,
केकरो खइयाल हे,
केकरो जबाब हे,
कि निसा केकरांञ् हे ?

निसा दरुवांञ् हे,
निसा जवानींञ् हे,
निसा पियारांञ् हे,
निसा गांजांञ् हे,
आर नांय जाने निसा केकर-केकरांञ् हे ?

हमर खेयाले हे,
निसा जेतना दारुवांञ् हे,
निसा ओतने जवानींञ् हे,
आर ओतने पियारांञ् हे,
आर तो आर निसा ओतने गांजांञ् हे,
ई तो हमर खेयाल हे।

ई तो बस एगो खेल हे,
जे डहरेक तमासा हे,
जेकरांञ भरम हे, झूठ हे,
आर तो आर ई ठकवा हे।

निसा केकरांञ हे,
केकरो सबाल हे,
केकरो जबाब हे,
केकरो मिजाइज हे,
केकरो धाक हे,
केकरो खइयाल हे,
तो हमरो जबाब हे,
हकीकतांञ् तो ई निसा कुरसीयांञ् हे।

कवित्री- मालती कुमारी

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