पढ़ाइ – सोनी कुमारी

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By Krishna Kunal

पढ़ाइ

छउवे घरी लेल पीछा
तखने ले परेसान ही
ई कधिया सिरयतय
ओकरे आसे लागल ही ।

कतेक दिन से झोला उठवली
हांथे मुडें आरो बेगे टांगल ही
मगजेक बोझा कधिया हटतय
ओकरे आसे लागल ही ।

कतना गाइर माइर के सहली
रइट रइट के माथा पागल ही
कधिया एकर फल पाइबय
ओकरे आसे लागल ही ।

छउवा ले जुवान तक पाइली
घार छोइड़ परदेस भागल ही
कधिया जे घार घुरबय
ओकरे आसे लागल ही ।

कतेक बोड़ बोड़ परीछा लिखली
छोट परीछाव नाइ पास करल ही
आपन गोड़े कधिया जे ड़ड़ाइबय
ओकरे आसे लागल ही ।

जंदे जांय तंदे एकरे चवय चुगली
छोट बोड़ सभेक एके सुनल ही
सरकारेक वेंकेसीं कधिया से अइतय
ओकरे आसे लागल ही ।

बिहा सादीक अइसने तलतली
उमर बितल जाइ रहल ही
कधिया जे नावा बिहान भेतय
ओकरे आसे लागल ही । ।

कवित्री- सोनी कुमारी

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