
लेखक – प्रेमचंद
खोरठा अनुवाद – अम्बुज कुमार ‘अम्बुज ‘
रमजानेक पुरा तीस रोजाक बादें ईद आइल हे । गांवें- गांवें कते चहल – पहल हइ । ईदगाह जाइके तइयारी होइ रहल हइ! केकरो कुरता के बटम टुटल हइ तो पड़ोसीक घार से सुइ – सुता लावेले दउड़ल जाइ रहल हे। ककरो जुता डाँट भइ गेल हइ तो ओकर में तेल डाले खातिर तेलीक घार भागल जाइ रहल हइ । लोक चाड़ें – चाड़ें गरु – डांगर के सानी – पानी दइके निफिकिर होइ रहल हथ । ईदगाह से घुरे में अड़बेरिया होवे पारे ।
छउवा – चेंगइर सोबके सोबले बेसी हुइब । केउ एगऽ रोजा राखल हे उभी दुपहर तक । केउ उभी नाइं राखल हइ,मेंतुक ईदगाह जाइक खुसी उसबकेर बांटा लागइ ।रोजा तऽ बड़लोकेक आर बुढ़ा – बुजुरगेक खातीर । छउवा – चेंगइर के खातिर तऽ ईद । रोजे ईद के नाम रट – हला, आइज आइ गेल – हइ । आब सोब गिदइर – चेंगइर के चांड़ हइ कि लोक ईदगाह काहे नाइं जा- हथ । बइर – बइर आपन जेब से आपन खाजाना गन- हथ आर खुस भइके फइर राइख दे – हथ । मेहमुद गन – हइ – एक – दू – दस बारह ! ओकर पास बारह पइसा हइ । मोहसीन के पास एक – दू – तीन – आठ – नो पंदरह पइसा हइ । एहे अनगनइत पइसा से अनगिनतीक आनत – खेलोउना, मिठाइ,बांसरी, गेंद आर जाने कि – कि.. आर सोब से खुस हइ हामीद । हामीद आपन बुढ़ी आजीक कोराइँ सुते । हामीदेक गोड़ें जुता नाइं । मुडें एगऽ पुरना टोपी हइ जकर गोटा करिया भइ गेल – हइ ।
गाँवेक सोब मेला चलला । छउवा – चेंगइर संग हामीदो मेला जाइ रहल हे । कभुं सोभीन दउड़के अगुवाई जा – हथ, फइर कोनो गाछेक जुड़ाइं सुस्ताइ के आपन संगी सोबके इंतजार कर-हथ, ओखिन काहे एते लुसुर – लुसुर चल – हथ, हामीदेक गोड़ें तऽ जइसन पांखा लाइग गेल – हइ ।
सहर आइ गेलइ । बोड – बोड़ दालान आवे लागल ।ई कचहरी हइ – ई कोलेज हइ, ई कलब घार लागई । एते बोड़ कोलेजें कते गिदइर पढ़इत हता? सोब गिदइर नाइं लागथ जी – बोड़ – बोड़ लोको हथ । सच में उसबके बोड़ – बोड़ मोंछ – दाढ़ी
हइन । एते बोड़ भइ गेलथ – एखनो तक पढ़ेले जा – हथ । नाइं जानी कब तक पढ़ता आर कि करता अइसन पइढ़के ? हामीदेक मदरसा में भी दू – तीनगऽ बड – बड गिदर हथ । बिलकुल तीन कउड़ी के । रोज माइर खा हथ कामचोर सोब – ई जगहूँ एहे तरी लोक हथ आर कि ?
अच्चकें ईदगाह देखाइ लागल । नामाज खतम भइ गेल हइ ।
लोक आपस में भेंट- आंकवाइर कर – हथ । तकर बादें मिठाइ आर खेलोउनाक दोकानें टुइट पड़ता । गांवेक बड़ भी ई मामलें गिदइर – चेंगइर से कम नाइं । ई देख झूला – एक पइसा दइके चइढ़ जो, कभूं आकासें जाइक भान हतो तो कभी भुंइये गिरल ।ई लागो – चरखी, काठेक हाथी – घोड़ा -उँठ छड़ से लटकल हइ । एक पइसा दइके बइस जो आर पचीस बेरहा घुरेक मजा ले । नूरे आर सम्मी ई घोड़ें आर उँठें बइठल – हथ ।
हामीद फरकें ठंढुवाइल हे । तीने पइसा तऽ हइ ओकर पास ।
आपन खाजाना के सवइया तनी – तनी चक्कर काटे में तऽ खरच नाइ करे पारे?
सभीन चरखी से नाभला । आब खेलोउना लेता । हिदें दोकानेक कातार लागल – हइ । नाना रकमेक खेलोउना हइन । सिपाही आर गुजरिया, राजा आर ओकिल, भिस्ती आर धोबिन आर साधु – वाह ! कते सुंदर खेलोउना हइन । जइसन एखने बजकतइ । मेहमूद सिपाही लेल – खाकी पोसाक आर लाल पगड़ी वाला ‘ अइसन बुझाहइ कि एखने बइजके आइ रहल – हइ । मोहसिन के भिस्ती पसींद भेलइ । कमर झुकल हइ । उपर हांड़ी राखल हइ । हांडीक मुंह के एक हांथें धरल – हइ – जइसन कि हांडिक पानी उझले खोज – हइ । नूरे के ओकिल से टान हइ । कइसन गुन झलक – हइ ओकर मुहें । करिया लबादा नीचे सादा कामीज आर कामिजेक पासेक जेबें घड़ी । सोनोइली चेन एक हाथें कानूनेक पोथी लेल हइ ।गमाहइ एखने कोनो कचहरीं बहस कइर के आइ रहल – हइ ।. ई सोब दू – दू पइसाक खेलोउना लागइ । हामीदेक पास मोटे तीन पइसा हइ । एते दामी खेलोउना उ कइसें लेत? खेलोउना कहीं हाथ से छुइट जितइ त ऽ चूर – चूर भइ जितइ । तनी पानी पोरलें रंग छुइट जितइ । अइसन खेलोउना लइ के उ कि करत ? मेंतुक लोभी ऑइख से उ खेलोवइन के देइख रहल – हइ – आर चाह – हइ कि कुछ खन खातिर खेलोवइन आपन हांथें लिये पारतलइ!
खेलोउना के बाद मिठाइ आवइ। केउ रेबड़ी लेला,केउ गुलाब जामुन आर केउ मोहन हलुवा । सोभीन मजा कइरके खाइ रहल – हथ ।
मिठाइ के बाद कुछु दोकान लोहाक जिनिसेक हइ आर कुछु गिलइट आर नकली गहनाक । छउवा – चेंगइर के हिंया कोनो टान नाइ । ओखिन आगु बइढ़ गेल – हथ । हामीद लोहाक दोकाने ठंढुवाई गेल । दोकाने कइगो चिमटा राखल रहइ । ओकरा इयाद भेलइ – आजीक पासें चिमटा नखइ । जखन आजी तावाइं रोटी पकवइत रहइ तो ओकर हाथ जइर जाइत रहइ । जदि ई चिमटा लइके आजीक दइ देबइ तो आजी कते खुस हती ‘ ! फइर तो ओकर अंगरी कभुं नाइं जरतइ आर घारें एगो कामेक जिनिसो भइ जितइ, खेलोउना से कि फाइदा ?
हामीदेक संगी सोब अगुवाइ गेल – हथ । सोभीन सरबत पिअ – हथ । देख सोभीन कते लोभी लागथ । एतना मिठाइ लेला हमरा केउ एगो नाइं देला आर उसब कहता कि हामर संग खेल – हामर ई काम कइर दे । आब जदि केउ कोनो काम करे कहता तो पुछबइ । खात मिठाइ आपने दांत पोचतइ – फोड़ा फुंसरी हतइ । ओखिन के जिउ दलीदर भइ जितइ । सोभीन हंसता कि हामीदें चिमटा लेल हइ । हंसता तो हांसत – हामर ठेप से । हामीदें दोकानदार के पुछलइ – ई चिमटा कते के हइ ? दोकानदार ओकर बाट देइखके आर कोनो बड़़ लोक ओकर संगे नाइं देइखके कहलइ – ई तोर कामेक जिनिस नाइं लागो बाबू!
” बेंचें खातिर लागो कि नाइं?”
” बेंचे खातिर नाइं रहतलइ तो हिंया काहे लाइद के लानलहिये?”
“तो बतवे हें काहे नाइं – कइ पइसाक लागो ?”
” छह पइसा लागतउ “
हामीदेक कलेजा बइस गेलइ ।
” ठीक – ठीक बताव “
” ठीक – ठीक पांच पइसा लागतउ, लेना हो तो ले नाइं तो चलते बन “
हामीद कलेजा के डांट कइरके कहलइ – ” तीन पइसा लेबें ” ई कहइके उ आगु बइड़ गेलइ – कहीं दोकानदार डांटे नाइं जइसें ।
मेंतुक दोकानदार डांटलइ नाइं – हांकाइके चिमटा दइ देलइ ।
हामीद चिमटा लइके ई रकम कांधें राखल जइसन बन्धुक लागइ आर उ छाती फुलाइके आपन संगी सोब के पास अइलइ – ” तनी सुनों तो कि – कि खुट – चाइल कर – हथ। “
मोहसिन हांइसके कहलइ – ” ई चिमटा काहे लेलें रे पगला – एकरा कि करभीं ? “
हामीद चिमटा के भुइयें पटइक के कहलइ -” तनी भिस्ती के भुइयें गिराउ _ सोब चूर – चूर होइ जितइ बच्चू के ।” महमुद कहलइ – ” ई चिमटा कोनो खेलोउना लागउ ? ” हामीद कहलइ
” खेलोउना काहे नाइं लागइ – एखने कांधें राखलें बंधुक भइ गेलइ, हांथें राखलें फकीरेक चिमटा । चाहे तऽ एकर से मजीरा (खंचरी ) के काम लइ सके हें । एक चिमटा लागाइ देबउ तऽ तोहीन के सब खेलोउना के परान निकइल जितउ । तोहीन के
खेलोउना कतनो जोर लगावतो तऽ हामर चिमटा के कुछ नाइं करे पारतउ । हामर बाहदूर सेर लागइ – चिमटा!”
सम्मी खंचरी लेल हइ । चिमटा से परभावित भइके कहलइ –
” बदलबें – दु आनाक लागइ ” हामीद खंचरी के हिकारइत नजइर से देखलइ आर कहलइ -” हामर चिमटा चाहे तऽ तोर
खंचरी के पेट चिरे पारे । बस चिमटाक झालइर लागाइ देबइ
तऽ ढब – ढब बोले लागतइ । तइनको पानी पइलो तऽ गेलोउ । हामर बाहदूर चिमटा आइगें, पानी, आंधी – तुफानें हर सवंइ डांढ़ाइल रहतउ l”
चिमटाइं सोब के मन मोहइ लेलइ । मकीन आब पइसा ककरो पास नाइं, फइर मेला से दूर आइ गेल – हथ । नोव कखन बइज गेलइ, पीट फाटा रउद भइ गेलइ । आब घार पहुंचेक चांड हइ!
बाप से हुजइत भी करइ तऽ चिमटा नाइं मिलतइ । हामीद लाइ बड़ी चालाक – एहे ले बदमास आपन कांचा के बांचाइ के राखल हल ।
आब छउवइन के दु दल भइ गेलइ – एक बाट माटी हइ तऽ दोसर बाट लोहा । जदि कोनो सेर आइ जाइ तऽ मिंया भिस्ती के सिटी – पीटी गुम । मिंया सिपाही बंधुक छोइड़के भाइग जाइत आर ओकिल साहेब के तऽ नानी मोइर जितइ आर लाबादा में मुंह घुसाइके सुइत जाइत। मगुर ई चिमटा – ई बाहदूर – ई रुस्तमे हिंद लपइक के सेर के गरदन चइढ़ जितइ आर ओकर अंखवइन के बाहर निकाइल देतइ ।
मोहसिन बड़ी हिमइत कइरके कहलइ -” आछा पानी तऽ नाइं
भोइर सको – हउ तोर चिमटा?” हामीद चिमटा के सोझ (सीधा) कइरके कहलइ -” भिस्ती के एक दपट लगवतइ तऽ दउड़ल पानी लाइनके देवालें छिटकवे लागतइ।” मोहसीन हाइर गेलइ मेंतुक महमुद फेदरलइ -” बच्चू धाराइ जितउ तऽ
कचहरीं बांधाइ घुरइते रहतउ, तखन ओकिल साहेबेक गोड़ें
गिरेले हतउ । हामीद ई बोड़ पुछाड़ ( प्रश्न ) के जबाब नाइं दिये पारलइ । हामीद पुछलइ -” हामरा पकड़ेले के अइतइ ?”
नूरें अकइड़के कहलइ -” ई सिपाही बंधुक बाबा।”
हामीद मुंह बिचकाइ के कहलइ – ” ई बेचारा हामर बाहदूर रुस्तमे हिंद के पकड़तइ? आछा आव तनी पटका – पटकी
होइ जाइ। ई एकर मोहड़ा देइखके फरकें भागल जितउ बेचारा।”
मोहसिन के एगऽ नउतन चोट सुझलइ – ” तोर चिमटाक मुंह तऽ रोज आइगें जरतउ।” मोहसिन सोचल कि हामीद एकदम
सन्न रहइ जितइ । मेंतुक बात ई नाइं भेलइ । हामीदें जबाब देलइ -” आइगें तऽ बाहदुरे देइ भाइ – आइगें झांप हामर रूस्तमे
हिन्दे देइ सकहे।”मेहमूदें एक बइर आरो जोर लगवलइ-कहलइ
-” ओकिल साहेब तऽ कुरसी टेबुलें बइसतइ – तोर चिपटा तऽ
रांधना घारें भुइयें पड़ल रहतउ।”
ई तरकें सन्नी आर नूरे के भी जान आइ गेलइ । कते सटीक बात कहलइ – मेंहमुदें । चिमटा रांधा घारें रहेक सिवा आर कि कइर सकेहे? हामीद के कोनो सटीक जबाब नाइं सुझलइ तऽ धांधली सुरु कइर देलइ आर कहलइ -” हामर चिमटा रांधना
घारें नाइं रहतइ । ओकिल साहेब जखन कुरसीं बइसतइ तखन
ओकरा भुइयें पटइक के ओकर कानून ओकर पेटें भोइर देतइ।”
‘ कानून के पेटें भोइर देल ‘बात छाइ गेलइ । एते छाइ गेलइ कि तीनो सुरमा मुंह ताकते रहइ गेला – हामीद जीत गेलइ । ओकर चिमटा रुस्तमें हिन्द लागइ । आब एकर में मोहसिन, मेहमूद आर सोभीन के कोनो हुजइत नाइं । आर लोक तीन – तीन, चाइर – चाइर आना खरच करला मेंतुक कोनो कामेक जिनिस नाइं लिये पारला । हामीद तीने पइसाइं रंग जामाइ देलइ । सही बात लागइ – खेलोउना के कि भोरसा ? टुइट – फुइट जितइ – हामीदेक चिमटा तऽ सोब दिन रहतइ – बछर – बछर तक!
तपसियाक (फैसला) केर सरत होवे लागलइ । मोहसिन कहलइ -” तनि आपन चिमटा दे तऽ- हाम्हूं देखी – तोइं हामर भिस्ती लइके देख।”
मेहमुद आर नूरे भी आपन – आपन खेलोउना हामीद के पेस कइर देला । हामीद ई सरतवइन के माने में कोनो आना – कानी नाइं करलइ । चिमटा एक – एक कइरके सोब के हांथे गेलइ आर उसब के खेलोउना एक – एक कइरके हामीदेक हांये अइलइ ।
हामीद हाइर माइन लेल आर सोभेक आंखीक लोर पोंइछ के कहलइ – -” हाम तो तोहीन के चिढ़ाई रहल हिओउ – भाला ई
खेलोवइनके के मोकाबला करतइ । गमाहइ एखन बोलतइ – तखन बोलतइ ।”
मोहसिन कहलइ -” मकिन ई खेलोवइन के खातिर केउ असीस ( आशीर्वाद ) तऽ नाइं देतइ ।”
मेहमुद – ” असीस बोलेहें – उल्टा माइर नाइं पइड़ जाइ । मांइ जरूर कहती कि मेलाइं ई माटिक खेलोउनाइ मिललो!”
हामीद माइन लेलइ कि खेलोउना देइखके कोनो मांइ
एतना खुस नाइं हती जतना खुसी हामर आजी ई चिमटा देइखके हती । आब तऽ चिमटा रुस्तमे हिन्द लाइ आर खेलोउना के बादसाह भी!
डहरें मेहमूद के भुख लाइग गेलइ । बापें ओकरा कइरा (केला) देल रहइ । मेहमुद खाली हामीद के संगी बनवलइ । ओकर बाकी संगी सोब मुंह ताकते रहला । ई चिमटा केर फर ( फल ) रहइ ।
गारह बजे गोटे गांवें हुइल भइ गेलइ कि मेला देखे वाला
घुइर अइला । मोहसिन के छोट बहीन कुदल अइली आर भिस्ती ओकर हाथ से लुइट लेली आर खुसीक मारीं उछइल उठली – तइसीं भिस्तीह हेंठे गिर गेला आर सिराइ गेला । ई खातिर भाइ – बहिनें माइर – पीटो भइ गेलइ । दुइयो खूब कांदला । ओखीन के माइ जखन कांदना – काठी सुनली तो राइग के दू – दू चांटा आरो लगवली ।
मियां नूरे के ओकिल साहेब केर अंत एकरो से बेस भेलइ! ओकिल साहेब भुइयें बा धीरखें तऽ नाइं रहता, से ले देवाले दुगो खुंटी टांगल गेलइ । पटरें कागजेक कालीन बिछवल गेलइ.. ओकिल साहेब राजा भोज नियर सिंघासनें बिराजला । नूरे उनखरा पांखा से हावा करे लागलइ । मालूम नाइं पांखाक हावा से बा पांखाक चोट से ओकिल साहेबेक लबादा माटीं मिल गेलइ । फइर तऽ बड़ी जोर – सोर से मातम मनवल गेलइ! आर सेसें ओकिल साहेबेक हाड़ – पांजरा काचरा में डाइल दियल गेलइ ।
आब अइलइ मेहमुद के सिपाही । ओकरा झट – पट गांवेक पाहरा दियेक चारज मिल गेलइ । मकिन सिपाही तऽ पालकी में चलता । एगऽ टोकरी अइलइ, ओकर में कुछ लाल रंगेक फाटल – पुरना चेंथरा ( कपड़ा ) बिछवल गेलइ, जकर में सिपाही साहेब आराम से लेटता । नूरे ई टोकरी के उठवल आर आपन देहरी केर परिकरमा करे लागल ।ओखिन केर दुइयो छोट भाइ सिपाही नियर ” छूते वाला जागते रहो” ( सोने वाला जागते रहो ) कहइके चलते रहला । एहे मइधें मेहमुद के ठेंस लाइग गेलइ.. टोकरी ओकर हाथ से छुइट के गिर गेलइ आर मिंया सिपाही आपन बंधुक लइके भुइयें गिर पड़ला आर ओकर एगऽ गोड़ टुइट गेलइ । मेहमुद आइज जाने पारल कि उ एगऽ बेस डाक्टर लागे ।ओकरा अइसन एगऽ मरहम ( मल्हम ) मिल गेलइ जकर से उ ताता – ताही ( तुरंत ) जोइड़ सकेहे ।
गोड़ तऽ जोइड़ दियल गलइ मकिन जइसीं सिपाही साहेब के डंडवल गेलइ ओकर टेंग ( पैर ) जबाब दइ देलइ । चीर – फाड़ बेकार भइ गेलइ.. आब कम से कम एक ठीने तऽ संलसत से बइस सक – हइ ।
आब मियां हामीदेक हाल सुना.. अमीना आजी ( दादी ) ओकर राउ सुनली तऽ दउड़ले अइली आर ओकरा कोराइं उठाइके दुलार करे लागली । अचकें ओकर हाथों चिमटा देइखके उ चोंइक गेली.. हामीद से पुछे लागली…
” ई चिमटा काहां हलइ ? “
” हामे एकरा किनल हिये “
” कइ पइसाइं?”
” तीन पइसा देल ही”
अमीना छाती पीट लेली… कइसन बुरबक छउवा इइ.. दुपहर होइ गेलहइ.. ना तो कुछ खइलइ ना पीलइ… आनल कि ना चिमटा ! ” गोटे मेलाइं तोरा कोनो दोसर जिनिस नाइं मिललो जे ई चिमटा उठाइके लानलें?”
हामीदें कहलइ..” तोर अंगरी तावा में रोज रोटी पकवेक सवइं जइर जा हलउ.. ऐहे ले हाम ई चिमटा लइ लेली ।”
बुढ़ियाक गोसा झटें दुलारें बदइल गेलइ ।छोंड़ा( लड़का ) में कतना तियाग, कतना भाब आर बुइध हइ? दोसर के खेलोउना लियइत सवइं आर मिठाइ खाइत सवइं एकर मन कतना ललचाइत हतइ? उहूं एकरा ई बुढ़ी आजीक इयाद आवइत रहलइ । अमीनाक हिया गदगदाइ गेलइ…उ कांदे लागली.. दुइयो हाथ उठाइके असीस दिये लागली आर आपन आंइख से बोड़ – बोड़ लोरेक फोटा गिरवे लागली!
आपन बर-बंधु जोरे share करा… 🙏🏻





