भाखा – रितु घांसी

भाखा हाम लागी भाखा, भाखाक मान जोगाय राखाहामर नजइर चाइरो दन, तनी ओनाय के देखा।ओहाइर कइर के देखा, गोहाइर कइर के सुना।साड़ा ही सबद ही , उ तो हाम्हीं लागी भाखा ओनाइ के सुना, नजइर गबचाय के देखाडेढ़ करोड़ लोकेक, जीवेक भीतरे हामर बासा।आर आइझ देइख ले हे, हामर इ दासाआझुक नउतन छउवा, हेंरावला हामर … Read more

मानुसेक सक्ति – रमेश कुमार

मानुसेक सक्ति हे मानुस! बुझ नाञ् –तोंञ् आपन के हीन,उठ–उठ,जाग–जाग –आपन के तोंञ् चिन्ह| तोर गातेक आइगे –होवे पारे पहार धूरा |तोर मगजेक धार देइख –लाजे पराइ जितो छूरा | अंगे – गाते- मने जगाव –बोल – बुइध – भोरोसा,तभी पूरा हवत सभे –पुरखाक देखल -आसा | कवि – रमेश कुमार

ओझाक (सोखाक) भेउ – रमेश कुमार

ओझाक (सोखाक) भेउ हां रे,,, के,, के,, देखले हा –भूत – डाइन ?जो,,जो,, हाम्हूं देखबइ,तनी हांकाइ आन, कइसन होवे हे डाइन भूतेक जाइतकइसें उ सब मोरावे हे मानुसेक जाइत ? हांकाव,,हांकाव,, उखनी केतनी हाम्हूं देखबइ,,उखनी सें बतियइबइ,,गप सप करबइहाल चाल पूछबइ ! कि कहलें,,,उ सब रहो हथ –सोसाने,, मसाने,, मुरदार घाटें ?उखनी के बस कइर … Read more

निसा केकरांञ हे – मालती कुमारी

निसा केकरांञ हे निसा केकरांञ हे,केकरो सबाल हे,केकरो जबाब हे,केकरो मिजाइज हे,केकरो धाक हे,केकरो खइयाल हे,केकरो जबाब हे,कि निसा केकरांञ् हे ? निसा दरुवांञ् हे,निसा जवानींञ् हे,निसा पियारांञ् हे,निसा गांजांञ् हे,आर नांय जाने निसा केकर-केकरांञ् हे ? हमर खेयाले हे,निसा जेतना दारुवांञ् हे,निसा ओतने जवानींञ् हे,आर ओतने पियारांञ् हे,आर तो आर निसा ओतने गांजांञ् हे,ई … Read more

माहंगा – मानिक कुमार

माहंगा दुनियादारीक अइसने चिंता फिकिर ,एकर खातिर कते खिचीर फिचिर । चाइरो बाटे लोक भिखनाइल हथकेव कम त केव बेसी धराइल हथ । हेवइ बोड़ घारेक ढेइर खुसी हांसीएकर जालाञ गरीब रहथ उपासीं। गोटे दुनिया हथ तोर से परेसानकुछु त किरपा करा हे भगवान । हियां जखन से तोंय आइल हेंगरीबेक पेटे लाइथ मारल हें … Read more

झूठ कर दोष – मनोज कुमार कपरदार

झूठ कर दोष आलस्य कर आंईख मेंप्यार कर सपना देखह हलयलाल साड़ी पिंइंद केआपन सूरज कर आशा मेंरोइज रहह हलय उषादिन जैसे जैसेचढ़े लागलयडइर गेलय उषायाद आवे लागलयआपन संगी संध्या कर बातउ तो थईक गेलयथईक के हाइर गेलयएगो भोड़ा इलचीलागे लागलयघूईर गेलय भारी मनेहामराउषा कर ऐसन घूईर गेलठीक नाय लागलयकहीं ओकरझूठ कर स्वाभिमानचांद कर जईसनआत्महत्या … Read more

चांद कर रोशनी – मनोज कुमार कपरदार

चांद कर रोशनी आइज फेर चांद केबदरी टाय ढांइप लेलयऐसन कखनो कखनोहोव हयकाइल कर बात लागयगरम रोध टायमूलवासी करकयेक गोजुलूस बाहराइल हलयआशा हलयचांद करकुछ हिस्सा मिलतयलेकिनचांद टा केबदरी टाय ढांइप लेल हलयचांद कर रोशनी खातिरबदरी टा के चीरे हतक। कवि – मनोज कुमार कपरदार

बेटी – भुनेश्वर महतो

बेटी बेटी के चांद नाञ बनावाताकि कोय घुइर घुइर के देखेबेटी के सुरूज बनावाताकी ओकरा घुरे से पहिले नजइर हेंठ होय जायसोभे बेटीक भाइग में बाप हेव हथसोभे बापेक भाइग में बेटी नाञ हेव हथबेटी कुछो भी मांग हथत बिना सोंचले समझले सोब लाइन दे हथकाहे की एहे बेटीक बिहाक बादेकुछो देला से कहो हथकि … Read more

हामनिक संसकिरति – बसंत कुमार महतो

हामनिक संसकिरति(खोरठा कविता) हामनिक समाजे रीत चलल हइहिंयाक संसकिरति से जुड़ल हइआर अइन राइज ले फरक हइपरनाम आर जोहार एहे बनल हइहामनिक माय माटी से जुड़ल हइहिञाक संसकिरति ले पियार हइमडुवाक लेटो जोंड़राक घाठापुआ संगे आरो अइरसापीठाहिया नाना रकमेक सवाद हइहामनिक संसकिरति ले पियार हइघोड़ा, झुमइर, जदुर नाचझुमटा, पाइका, नटुआ नाचदेखा आरो कतेक नाच हइएकरे … Read more

मायकोरवा भासा – बसंत कुमार महतो

मायकोरवा भासा मायकोरवा भासा जिनगीक खुंटा हे,मायकोरवा भासा जिनगीक मुइख अंग हे,मायकोरवा भासा ले बइढ़ेक आर कुछो नाय हे,बस येहे एक – दोसरेक बिसवास हे, मायकोरवा भासाक मान देबा,विश्व स्तरे इकरा बढ़ावा देबा,ई भासाक बोलिक खुसीक महसुस करबा,जे भासाक, होस पावल दिने पावल ही,सेहे भासाक आइज फिर से,मायकोरवा भासा दिने ले सुरु करा । मायकोरवा … Read more