भारत को वैसा विकसित राष्ट्र नहीं बनना है जो दूसरे राष्ट्र के राष्ट्रपति का अपहरण करें : डॉ सुबोध

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By Mukesh Ram Prajapati

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शनिवार को स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विषय था “चरित्र निर्माण: विकसित भारत की पृष्ठभूमि।”

प्रतियोगिता में तृतीय समसत्र की छात्रा आयुषी सिंह प्रथम स्थान पर रही। वहीं इस समसत्र के विद्यार्थी पिंटू रजक द्वितीय स्थान पर और सुप्रिती भारती तृतीय स्थान पर रहे। कुल सात विद्यार्थियों ने भाग लिया। आयुषी सिंह और सुप्रिती भारती अंग्रेजी में भाषण दिए वहीं पिंटू रजक ने हिंदी में भाषण दिया।

इस मौके पर शोधार्थी धर्मेंद्र कुमार और महेंद्र पंडित निर्णायक की भूमिका में रहे। प्रतियोगिता की व्यवस्था में शोधार्थी विकास कुमार यादव एवं इंस्पायर फेलो अनन्या पांडे मुख्य भूमिका में रहे। सभी विजेताओं को 19 जनवरी को विश्वविद्यालय में आयोजित विवेकानंद जयंती समारोह में रामकृष्ण मिशन रांची के सचिव स्वामी भविष्यानंद जी के द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि भारत को कैसा विकसित देश बनना है। उन्होंने बताया कि भारत को ना तो “महाशक्ति” बनना है और ना तो “प्रमुख शक्ति” बनना है बल्कि भारत को एक “महान शक्ति” के रूप में विकसित होना है।

विभावि के स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह के संयोजक एवं हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ सुबोध कुमार सिंह बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को सुशोभित किए। उन्होंने बताया कि भारत को वैसा विकसित देश नहीं बनना है जो दूसरे राष्ट्र के राष्ट्रपति को सपत्नी अपहरण कर लेता है। वैसा विकसित देश भी नहीं बनना है जहां के लोगों को बोलने की आजादी नहीं है, जो पड़ोसियों के जमीन पर कब्जा करना चाहता हैं और जो अपने पड़ोसी राष्ट्र से बेवजह के युद्ध करता हैं। उन्होंने बताया कि भारत एक ऐसा विकसित देश बनेगा जहां लोगों के साथ-साथ राष्ट्र का चरित्र ऐसा होगा जो शांति, न्याय, सहयोग और सद्भावना को बढ़ावा देगा।

इस अवसर पर विभागीय प्राध्यापक डॉ अजय बहादुर सिंह, बरकट्ठा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बलदेव राम, के बी महिला महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका मेरी नेली पुष्पा कुजूर के अलावे विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी अच्छी संख्या में उपस्थित हुए।

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