निसा केकरांञ हे – मालती कुमारी

निसा केकरांञ हे निसा केकरांञ हे,केकरो सबाल हे,केकरो जबाब हे,केकरो मिजाइज हे,केकरो धाक हे,केकरो खइयाल हे,केकरो जबाब हे,कि निसा केकरांञ् हे ? निसा दरुवांञ् हे,निसा जवानींञ् हे,निसा पियारांञ् हे,निसा गांजांञ् हे,आर नांय जाने निसा केकर-केकरांञ् हे ? हमर खेयाले हे,निसा जेतना दारुवांञ् हे,निसा ओतने जवानींञ् हे,आर ओतने पियारांञ् हे,आर तो आर निसा ओतने गांजांञ् हे,ई … Read more

माहंगा – मानिक कुमार

माहंगा दुनियादारीक अइसने चिंता फिकिर ,एकर खातिर कते खिचीर फिचिर । चाइरो बाटे लोक भिखनाइल हथकेव कम त केव बेसी धराइल हथ । हेवइ बोड़ घारेक ढेइर खुसी हांसीएकर जालाञ गरीब रहथ उपासीं। गोटे दुनिया हथ तोर से परेसानकुछु त किरपा करा हे भगवान । हियां जखन से तोंय आइल हेंगरीबेक पेटे लाइथ मारल हें … Read more

झूठ कर दोष – मनोज कुमार कपरदार

झूठ कर दोष आलस्य कर आंईख मेंप्यार कर सपना देखह हलयलाल साड़ी पिंइंद केआपन सूरज कर आशा मेंरोइज रहह हलय उषादिन जैसे जैसेचढ़े लागलयडइर गेलय उषायाद आवे लागलयआपन संगी संध्या कर बातउ तो थईक गेलयथईक के हाइर गेलयएगो भोड़ा इलचीलागे लागलयघूईर गेलय भारी मनेहामराउषा कर ऐसन घूईर गेलठीक नाय लागलयकहीं ओकरझूठ कर स्वाभिमानचांद कर जईसनआत्महत्या … Read more

चांद कर रोशनी – मनोज कुमार कपरदार

चांद कर रोशनी आइज फेर चांद केबदरी टाय ढांइप लेलयऐसन कखनो कखनोहोव हयकाइल कर बात लागयगरम रोध टायमूलवासी करकयेक गोजुलूस बाहराइल हलयआशा हलयचांद करकुछ हिस्सा मिलतयलेकिनचांद टा केबदरी टाय ढांइप लेल हलयचांद कर रोशनी खातिरबदरी टा के चीरे हतक। कवि – मनोज कुमार कपरदार

बेटी – भुनेश्वर महतो

बेटी बेटी के चांद नाञ बनावाताकि कोय घुइर घुइर के देखेबेटी के सुरूज बनावाताकी ओकरा घुरे से पहिले नजइर हेंठ होय जायसोभे बेटीक भाइग में बाप हेव हथसोभे बापेक भाइग में बेटी नाञ हेव हथबेटी कुछो भी मांग हथत बिना सोंचले समझले सोब लाइन दे हथकाहे की एहे बेटीक बिहाक बादेकुछो देला से कहो हथकि … Read more

हामनिक संसकिरति – बसंत कुमार महतो

हामनिक संसकिरति(खोरठा कविता) हामनिक समाजे रीत चलल हइहिंयाक संसकिरति से जुड़ल हइआर अइन राइज ले फरक हइपरनाम आर जोहार एहे बनल हइहामनिक माय माटी से जुड़ल हइहिञाक संसकिरति ले पियार हइमडुवाक लेटो जोंड़राक घाठापुआ संगे आरो अइरसापीठाहिया नाना रकमेक सवाद हइहामनिक संसकिरति ले पियार हइघोड़ा, झुमइर, जदुर नाचझुमटा, पाइका, नटुआ नाचदेखा आरो कतेक नाच हइएकरे … Read more

मायकोरवा भासा – बसंत कुमार महतो

मायकोरवा भासा मायकोरवा भासा जिनगीक खुंटा हे,मायकोरवा भासा जिनगीक मुइख अंग हे,मायकोरवा भासा ले बइढ़ेक आर कुछो नाय हे,बस येहे एक – दोसरेक बिसवास हे, मायकोरवा भासाक मान देबा,विश्व स्तरे इकरा बढ़ावा देबा,ई भासाक बोलिक खुसीक महसुस करबा,जे भासाक, होस पावल दिने पावल ही,सेहे भासाक आइज फिर से,मायकोरवा भासा दिने ले सुरु करा । मायकोरवा … Read more

दुनिआयेंक रित – फुलचंद हमतो

दुनिआयेंक रित कि भेल दुनिआयेंक रितदेखि भय जाहों अचमभितरिसता नाताक सिमा नाइसास बहु ,भेंसुर के भाइ एखन ककरा कि कहबयतखन एगो हलय सवंयभेंसुर के छांह्इरे डांडा हला नाइएखन त लोटा-पानी देहथिन धराइ भेंसुर ज इडसास मामाससुर देखलींह हव-हला धाइरबड-छटक राखहला मानमुडेक उपर घुघा टाइन चाइल चलन लुइर लछनसब एखन बदलल हेखाप काटी ,काटाइल जिंसगांव घारे … Read more

मेहनइत के फोर – पुनीत साव

मेहनइत के फोर लोहखरे-भिनसरे उठलियउ मइया,पढ़इत-लिखइत भेलउ भोर गो।नोकरी-चाकरी लिये नाञ पारलियउ!अंखिया से चुवो हउ लोर गो! अनठेकान किताप हामें पढ़लियउ,पढ़ाय-लिखाय के नाञ हउ छोर गो।पढ़ल चीज नाञ अइलउ परीछवें,टप-टप चुवो हउ लोर गो! घारा से हामें दूर रहलियउ,सरधा कइसे पूरा होतउ तोर गो?पढ़लोक बादें भोथर भे गेलियउ,आर होय गेलियउ कमज़ोर गो। की हमर कपारें … Read more

नुनू जितइ ससुराइर – पुनीत साव

नुनू जितइ ससुराइर दारी-खोंखरी करे गेल हे,हमर नुनू नउवाक घर।नहाय-धोय के अइत इ ताब,खाय-पीय के जितइ संपइर! नावा-नावा कपड़ा पिंधतइआर कसतइ चमोटी!केंस चिरतइ ककरी सें आरसोलह पाइर के धोती! हाथें घड़ी,मोबाइल राखतइआर आंखीं चसमा!गोड़ें पिंधतइ चमरखानी जूताहीरो से देखइतइ कम नाञ! हामें पकाय-चोकाय देबइ,घटरा,ढुसका आर बररा!आर पकइबइ फुलोरी अडिसाससुराइर जितइ नुनू सररा! संदेस देतइ सास-ससुर … Read more