ई बछर के बिहा-सादी में – पुनीत साव
ई बछर के बिहा-सादी में ई बछर के बिहा-सादी मेंकरलूं मउजे-मोज।जंदे से नेवता आल रहो हेलहोंदे होय जा हलों सोझ! जलपान,कलवा आर बियारीबेस-बेकार खाय मिलो हेल तरकारीखस्सी,पठरू आर मुरगिक झोरजे खाय के हो हिंछा तोर। मांदर अखरें बाजे लागल होघोड़नाच देखावो हो जलवा।डीजे के धुन में नाचो होजनी,मरद आर फुलवा! एको तनि आब नाञ हवो … Read more