पछतावा – कुमारी अहिल्या

पछतावा जुवान घरी हिंदे हुंदेबड़ी सवंय के बरबाद करलोदेख बुढारी मने लागे खोंच होछउवा घरी बुझे नाय पारलोखेलते कुदते बितयलों दिन राइत होपढेक बेरा, पढे छोइड़नुकाइल रहलों पुटुस झुरेंआब मन कांपेसोंइच बुढारीक दिनेक बात होमुंह दांत नाइ, गाते जोर नाइकांपे हाड़ थर थर होदेख बुढारी मने लागल खोंच होसइले बाबु कहहोसवंय के पहचाना आर अगुवावाराइज … Read more

जागा रे झारखण्डी – संजय कुमार महतो

जागा रे झारखण्डी जागा रे झारखण्डी भाइ- बहीन अबरी जागा,कते दिन सुतल रहबे आपन हक खातिर भागा । लोक बेस बुइझ घरें देल्ही बाहरियाक ठांव ,घर त बनाइबे करलो आरो बनवलो गांव । काका जेठा भाइ दादा कहिके लेलो फुसलाइ,आर तोहुं हले अइसने सइले देलो तोरा बहराइ । ऊ तोर कमजोरी के बेस भाभे देखल … Read more

तोयँ झारखंडेक बाघ हलें – कवि कामेश जी

झारखण्डी शेर के नामें श्रद्धांजलि कविता तोयँ झारखंडेक बाघ हलेंराइग गेलें फुफवाइल नाग हलेंडुमरिक तोयँ चिराग हलेंठेठ देहाती दिमाग हलेंसंघरसें हदकल आइग हलेंलाचारेक चमकल भाइग हलेंशिवा बाबाक अनुराग हलेंJMM के तोयँ पाग हलेंझूठ बुइधगर खातिर तोयँ घाघ हलेंहाजिर जबाबी में बेबाक़ हलें झारखण्डेक राजनीति के तोयँ पहचान हलें1932 के सकत सम्मान हलेंखोरठा के तोयँ मान … Read more

पलायन (विदेश चइल गेल) – आजाद वर्णवाल

पलायन (विदेश चइल गेल) बाइस बछरेक जुवान झारखंडपता नाइ चलल कइसे बीत गेल!राइज बनल लोकेक जगल आसझारखंडी छोइड़ बाहरी ढुकाय देल!! कोयला आर लोहाक बनल फेकटेरीकते झारखंडी विस्थापित होय गेल!लोकेक सोसन आर अतियाचार देखीपेटेक जालांय गांव पलायन भय गेल!! सोंचला आब भासा संसकिरति बाचतरोजगारेक आसे-आसे उमर बीत गेल!कहला मांय माटी भासाक करब रक्छामेंतुक कुरसी पावल, … Read more

हाइरे कलि जुगवा बेटवा – अमित करमाली

हाइरे कलि जुगवा बेटवा हाइरे कलि जुगवाकमाल करल भारी रूपेक सुंदर जनी पायमांयेक दुधेक करज के बिसरल अनारीजनीक बाते लागी मांयेक करे गारी-फारीजनीक खातिर बेस – बेस काजर पाउडरमांय लागिन जुटे नांञ एको टिकलीहाइरे कलि जुगवा बेटवाकमाल करल भारी अनपढ़ गवारो दादामांगे ससुर से गाड़ीगाड़ी नी मिले तोबहुक करे थुरा- थूरीहाइरे कलि जुगवा बेटवाकमाल करल … Read more

आइझ-काइल – अमित करमाली

आइझ-काइल बाप रे! बाप छोंड़ा-छोंड़ीदेखाय जनी, मरद जइसनसुट-बुट एक जइसन फेकेक आर छोडेक आसान भेलक अइसनआइझ काइल सासता भेलक जइसन जोडाय घुमे एक संगबाप रे! बाप छोंड़ा-छोंड़ीदेखाय एक जइसन मांञ-बापेक नजइरे नाचेबहरबड छोंडवइन संगलाज नाञ लागे एको तइन आपन भाखा-संसकिरतिकछोडे लागल हत अइसनसांप छोडे आंचूर जइसन कवि- अमित करमाली

खोरठा एकांकी : किसानेक आत्महत्या

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ई घटना किसानेक आबगा पहरेक बेरा देइख के  लिखल गेल हे । पात्र परिचय:– 1.मरद पात्र –सोमरा (एगो चासा (किसान) 2.जनी  पात्र – बुधनी  आर रुसनी (चासाक दुगो बेटी)    जघऽ – घरेक आंगना मे दुइयो छउवा खेइल रहल हथ ।  बुधनी –     इचीक – मीचीक दांत कीचीक,                  लोवा लाठी चंदन काठी ।। 2  … Read more

 इंसानियत और करुणा की कहानी : बेबहार

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रांची : अइसने खाली गोड़ फाटल सट पेलटुन एगो छउवा आगु आइ के एखो डहर चलवइया के कहल – साहेब दु चाइर गो फोकना कीन ले न ।  चलवइया कहल – नाइ बाबु , हमरा एकर जउरत नेखइ।  छउवांञ फेर कहल- साहेब लइ ले न बेसी दाम नाइ एक टाका करे त हइ।  आर ओकर … Read more