दुनिआयेंक रित – फुलचंद हमतो

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By Krishna Kunal

दुनिआयेंक रित

कि भेल दुनिआयेंक रित
देखि भय जाहों अचमभित
रिसता नाताक सिमा नाइ
सास बहु ,भेंसुर के भाइ

एखन ककरा कि कहबय
तखन एगो हलय सवंय
भेंसुर के छांह्इरे डांडा हला नाइ
एखन त लोटा-पानी देहथिन धराइ

भेंसुर ज इडसास मामाससुर

देखलींह हव-हला धाइर
बड-छटक राखहला मान
मुडेक उपर घुघा टाइन

चाइल चलन लुइर लछन
सब एखन बदलल हे
खाप काटी ,काटाइल जिंस
गांव घारे खुब चलल हे

कहले त कहभे ,कहे हे
आर ना कहले चलबो नांय करे हे
ढुकाइ लेला बाहरी रित नित
कहले कहबथुन जुग ह उ आधुनिक

बेसी कहले गर इम जाह इन खूइन
माथा खराप भ इ जितो
एखनिक कथा सुइन सुइन

कवि – फुलचंद हमतो

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