पलायन (विदेश चइल गेल) – आजाद वर्णवाल

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By Krishna Kunal

पलायन (विदेश चइल गेल)

बाइस बछरेक जुवान झारखंड
पता नाइ चलल कइसे बीत गेल!
राइज बनल लोकेक जगल आस
झारखंडी छोइड़ बाहरी ढुकाय देल!!

कोयला आर लोहाक बनल फेकटेरी
कते झारखंडी विस्थापित होय गेल!
लोकेक सोसन आर अतियाचार देखी
पेटेक जालांय गांव पलायन भय गेल!!

सोंचला आब भासा संसकिरति बाचत
रोजगारेक आसे-आसे उमर बीत गेल!
कहला मांय माटी भासाक करब रक्छा
मेंतुक कुरसी पावल, बादे भुइल गेल!!

लोक बिकासेक सपुन देखल हला
नोकरी पइलो बादे डहरें आय गेल!
आबरी ककरो नाय देखब आसरा
पारब नाय आर विदेश चइल गेल!!

कवि- आजाद वर्णवाल

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