पढ़ाइ – सोनी कुमारी

पढ़ाइ छउवे घरी लेल पीछातखने ले परेसान हीई कधिया सिरयतयओकरे आसे लागल ही । कतेक दिन से झोला उठवलीहांथे मुडें आरो बेगे टांगल हीमगजेक बोझा … Read more

मिटे नायं दिहा माटिक मान – विनय तिवारी

मिटे नायं दिहा माटिक मान जखन हाम होसेक दुनियाएंडेग राखल हलोंतखनी से तोर नारा, पोस्टर बैनरमीटिंग सिटिंग देख हलोंआपन माटी, आपन भासा, आपन संस्कृति,आपन राइजके … Read more

मानुसे मानुस के मारे लागल – विनय तिवारी

मानुसे मानुस के मारे लागल मानुस आर मानुस नायं रहलमानुसे, मानुस के मारे लागलधन दौलतेंक पेछुएँ भेल एते पागलकि आपन खुइनो के नायं चिन्हे लागल।भाय … Read more

रे झारखंडी – रितु घांसी

रे झारखंडी रे झारखंडी, कते निंदाइल हेंएखनो त नजइर खोल !हियांक माञ माटी आर भासाकऊपर संकट !ताव तोञ निंदाइल हें ! आंइख खोल !उठ, जाग, … Read more

भाखा – रितु घांसी

भाखा हाम लागी भाखा, भाखाक मान जोगाय राखाहामर नजइर चाइरो दन, तनी ओनाय के देखा।ओहाइर कइर के देखा, गोहाइर कइर के सुना।साड़ा ही सबद ही … Read more

मानुसेक सक्ति – रमेश कुमार

मानुसेक सक्ति हे मानुस! बुझ नाञ् –तोंञ् आपन के हीन,उठ–उठ,जाग–जाग –आपन के तोंञ् चिन्ह| तोर गातेक आइगे –होवे पारे पहार धूरा |तोर मगजेक धार देइख … Read more

निसा केकरांञ हे – मालती कुमारी

निसा केकरांञ हे निसा केकरांञ हे,केकरो सबाल हे,केकरो जबाब हे,केकरो मिजाइज हे,केकरो धाक हे,केकरो खइयाल हे,केकरो जबाब हे,कि निसा केकरांञ् हे ? निसा दरुवांञ् हे,निसा … Read more

माहंगा – मानिक कुमार

माहंगा दुनियादारीक अइसने चिंता फिकिर ,एकर खातिर कते खिचीर फिचिर । चाइरो बाटे लोक भिखनाइल हथकेव कम त केव बेसी धराइल हथ । हेवइ बोड़ … Read more