चल नुनु पढ़ेल – थानेश्वर महतो

चल नुनु पढ़ेल चल नुनु पढ़ेल इसकुलवाचइल रहल हइनाम लिखाय अभियनवापढ़े – लिखेक समय होचल नुनु पढ़ेल इसकुलवा ।। पढ़ी – लिखी नौकरी करबेडाकटर इंजीनियर मास्टर बनबेपढ़ी – लिखी देसेक सेवा करबेतोरे ऊपर हइ आसचल नुनु पढ़ेल इसकुलवा ।। इसकुले मिलतो नुनुदुपहरिया मे खानाकिताप मिलतों मिलतो छात्रवृत्तिआरो मिलतो कुरता पेइट जुता मोजाचल नुनु पढ़ेल इसकुलवा … Read more

स्कीम के जमाना – ताराचंद महतो

स्कीम के जमाना एगो मेहरारू पेट दरदें भेली बेहाल,ओकरा लइके अइला सरकारी अस्पताल।ओकर हालइत देइखके डागटर साहेब घबराय गेल,सोब जाँच करवल बादे भरती करवेक सुझाव देल।मेहरारू के जच्चा वार्ड में भरती करवल गेल,भइ गेलय इलाज शुरू,दवा,सुईया चढे़ लागल।करीब! आधा घंटा भेल बादसिस्टरनी समाचार लइके अइली,आर कहली-बधाई हो! गिदरेक बाप के,निकाल फटा फट पाँच-पाँच सौ के … Read more

भरसटाचार – ताराचंद महतो

भरसटाचार माये-बापे पढाइ-लिखाइ के,तोरा आँफिसर बनाइ देलो ।आइझ देइख के लागो हइ कि,सोबले बोडो गुनहा करलो । घुस माँगे में लागलो नाइं तनिको शरम,मुहँ खोइलके माँगे हे तोञं।बेच देल्ही आपन इमान आर धरम,कि एगदमें बइन गेल हे तोञं बेशरम। लाखो-करोंडों धन लुइटके,बइन गेलहे तोञं माले-माल।पइड गेल हे तोञं इ.डी. के चक्कर मे,आब चक्की पिसिहें तोञं … Read more

हामर भाषा, हामर संस्कृति – गुलांचो कुमारी

“हामर भाषा, हामर संस्कृति” जनम, मरन तक, संग लइके चलब,विदेशी रंगे गरब नी करब,आपन भाखा, संस्कृति बोले में,कइसन लाज?मिली बचावे खातिर,उठावा आवाज। (1) जनमइते जेकरा माय से सुनली,खोरी खेलते जेकरा,संगी से बुझली,आजा-आजी कर आशिष लेखे ,हे मोर सोहराइ पुजा,पुरखा कर देल पुजा करे में,कइसन लाज?मिली बचावे खातिर,उठावा आवाज । (3) आजी कर अचरा ओढ़ी,भिते डायर … Read more

महुआ तोर गुन कैसन – गुलांचो कुमारी

आज कोयडीं सबजी खाली तो एकर गुन इयाद पड़े लागल… महुआ तोर गुन कैसन महुआ रे महूआतोर फुल कैसन?सृष्टिकरता कर बेजाय गुनभोरल हे हामर खोंचें सुनकली कली गिरहीघरी घरी सिझहीछौवाक मनमोही लागीभुख हामर पीछे भागीलाठा आर माठा कर रूप धरिपेटभोरवा जैसन ।महुआ रे महूआतोर फुल अयसन ! (१) महुआ रे महूआतोर फर कैसन ?परकिरती कर … Read more

बोनेक दरद – कृष्णा गोप

बोनेक दरद बोनेक दरद एइसन दरदजे मानुस बुझे ना जाने नाहमरा काइट के,हमर सीना फाइड केहमर गतर के लुगा चीर केतोयं बनैले चौइड़ा सड़कबिछाइले रेललाइनहमर अंतरी से तोयं निकाले कोयला, हीरा,तांबा, सोना ,लौहा आर अभ्रक हम हली तोर घर-आंगन के धरोहर आर जिनगीक के आधार।हमरे नामे भेलो तोर पहचानआबे तोयं हमर जिनगीक के मज़ाक बनैले,झूठे … Read more

कलमदानी – कृष्णा गोप

कलमदानी आसाढ़ परल घरेमइया आर बपा केफिकिर सुरु हो जाइय हेकोन धानेक बिहीनकरल से ठीक रहतोन ।।इ फिकिर बिहाने- बिहानेआरो गांवेक दादा,काकागोतिया सभेक पूछा-पूछीबतियाइक के ओरो डहरखोरियेन मे मेलान पहरभिनसरिया सभेकफिकिर देखल जाइय हे।। खैरकाखोची ,दुधकांडरनारधा,जोंगाधान,बाघपांजरललकाधान,कलमदानीमेहराधान आर करहेनीजे हय देहाती धानलागो हय जेकर माड-भातआर आलूक भेरता के सवादजे खइले हय सेहे जानो हयआइज इ कहनी … Read more

भेल हो बिहान – कुमारी अहिल्या

भेल हो बिहान सुना हो सुना होकोन दिगे पाराइल हाकजागा हो भेल हो बिहानआइलो नावा बिहानसमझा बुझा आरआगु गोड़ चे बढावाआब आइलो नावा बिहानकान कटवा से बाचाआपन मान के बचावाकइर जिगिस्ता पढ़ा लिखाभेवा समझदार ! हकंइध आगु बढ़ाकरा आपन दुरा पारलोक लाज छोइड़ केबढ़ावा आपन सान ।अस्सी से नब्बे होवाहोवा नाइ केकरो से कमदेखावा आपन … Read more

पछतावा – कुमारी अहिल्या

पछतावा जुवान घरी हिंदे हुंदेबड़ी सवंय के बरबाद करलोदेख बुढारी मने लागे खोंच होछउवा घरी बुझे नाय पारलोखेलते कुदते बितयलों दिन राइत होपढेक बेरा, पढे छोइड़नुकाइल रहलों पुटुस झुरेंआब मन कांपेसोंइच बुढारीक दिनेक बात होमुंह दांत नाइ, गाते जोर नाइकांपे हाड़ थर थर होदेख बुढारी मने लागल खोंच होसइले बाबु कहहोसवंय के पहचाना आर अगुवावाराइज … Read more

जागा रे झारखण्डी – संजय कुमार महतो

जागा रे झारखण्डी जागा रे झारखण्डी भाइ- बहीन अबरी जागा,कते दिन सुतल रहबे आपन हक खातिर भागा । लोक बेस बुइझ घरें देल्ही बाहरियाक ठांव ,घर त बनाइबे करलो आरो बनवलो गांव । काका जेठा भाइ दादा कहिके लेलो फुसलाइ,आर तोहुं हले अइसने सइले देलो तोरा बहराइ । ऊ तोर कमजोरी के बेस भाभे देखल … Read more