
JTET 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई तक बढ़ी, क्या B.Ed के नए छात्रों को भी मिलेगा मौका ?
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने एक बार फिर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET 2026) के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 जुलाई 2026 कर दी है । भाषा विवाद और नियमावली में संशोधन के बाद छूटे हुए अभ्यर्थियों को यह मौका दिया गया है । लेकिन 2016 के बाद से लटकी इस परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के मन में अब भी कई सवाल हैं ।
B.Ed. के नए छात्रों की उम्मीदें और असमंजस
सवाल यह उठ रहा है कि क्या आवेदन की यह अंतिम तिथि सच में 20 जुलाई ही रहेगी, या 2026-28 सत्र में एडमिशन करवाने वाले B.Ed. तथा D.El.Ed. प्रशिक्षुओं के लिए इसे फिर से बढ़ाया जाएगा? नियमावली के अनुसार, शिक्षाशास्त्र में नामांकन लेने के दिन से ही प्रशिक्षु इस पात्रता परीक्षा में भाग ले सकते हैं । चूंकि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि B.Ed. में नामांकन कई चरणों में होने के कारण यह दिसंबर-जनवरी तक होता ही रहता है , इसलिए नए सत्र के छात्रों द्वारा भी आवेदन की तिथि बढ़ाकर परीक्षा में बैठने के अवसर की मांग की जा सकती है । ऐसे में कब तक JTET 2026 का आवेदन करने की तिथि संशोधित होगी और परीक्षा कब आयोजित होगी, यह अभी भी तय नहीं है ।
क्या है JTET और क्यों है यह जरूरी ?
JTET (Jharkhand Teachers Eligibility Test) झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC), रांची द्वारा आयोजित की जाने वाली एक प्रकार की पात्रता परीक्षा है । यह राज्य के आगामी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के लिए निकलने वाले भर्ती परीक्षाओं से पूर्व परीक्षार्थियों की योग्यता की जाँच के लिए आयोजित किया जाता है । इसमें वैसे अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं जो D.El.Ed. या B.Ed. कोर्स पूर्ण कर चुके हैं अथवा एडमिशन ले चुके हैं । शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के अनुसार, CTET की ही तरह इस परीक्षा का आयोजन प्रत्येक वर्ष कम से कम एक बार होना चाहिए , जिसके उपरांत प्रति वर्ष सरकारी स्कूलों के रिक्त होने वाले पदों को भरा जा सके ।
2016 के बाद का लंबा इंतजार और विवादों का साया
झारखंड में अंतिम बार JTET 20 नवंबर 2016 में सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी । (द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार) । इसके बाद लंबे समय तक JTET आयोजित नहीं हुई है और तब से लेकर अब तक इसका फॉर्म केवल 2 बार (2024 और 2026 में) ही निकला है ।
2024 में विज्ञापन हुआ था रद्द: JAC द्वारा 20 जुलाई 2024 को विज्ञापन जारी कर फॉर्म निकाला गया था । लेकिन नियमावली में विसंगतियों और भाषाई विवाद के कारण इसे रद्द किया गया । नियमावली के अनुसार subject wise cutt रखा गया था और syllabus भी काफी high था। इसलिए इसमें सुधार की मांग की गई थी। जिसके बाद बात न्यायालय तक पहुंचा, जिसमें form भरवाने के बाद नियमावली में संशोधन अमान्य घोषित हुआ। और नई नियमावली तथा syllabus के साथ विज्ञापन फिर से निकालने के लिए 2024 के विज्ञापन को रद्द करना पड़ा। पलामू, गढ़वा और देवघर जैसे जिलों के अभ्यर्थियों के विरोध के बाद अंगिका, भोजपुरी और मगही जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर हुए विवाद के चलते भी करीब 3.50 लाख अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त करने पड़े ।
2026 का नया फॉर्म और फीस में राहत: 2024 के विज्ञापन रद्द होने के बाद, नया फॉर्म 21 अप्रैल 2026 को निकाला गया । जिन अभ्यर्थियों ने वर्ष 2024 में फीस जमा की थी, उन्हें डेटा सत्यापन करने पर दोबारा परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ रहा है ।
युवाओं के भविष्य पर गहराता संकट (वर्तमान नुकसान)
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) का समय पर न होना राज्य के शिक्षा तंत्र और लाखों युवाओं के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा संकट बन चुका है:
- लाखों अभ्यर्थियों की उम्र सीमा (Age Out) समाप्त होना: जो छात्र 2016 के बाद बीएड या डीएलएड करके बैठे हैं, वे पिछले 9-10 सालों से केवल इंतजार कर रहे हैं । इनमें से हजारों अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरी की तय उम्र सीमा पार हो चुकी है और उनके जीवन के कीमती साल बर्बाद हो चुके हैं ।
- शिक्षक बहाली से वंचित रहना: झारखंड सरकार ने हाल ही में सहायक आचार्यों की बड़ी बहाली निकाली थी । JTET न होने के कारण पिछले 10 सालों में पास आउट हुए नए अभ्यर्थी इस मुख्य बहाली प्रक्रिया में बैठने के योग्य (Eligible) ही नहीं बन पाए ।
- अन्य राज्यों के छात्रों से पिछड़ना: पड़ोसी राज्य बिहार में लगातार STET/BTET और BPSC के जरिए बंपर शिक्षक बहालियां हो रही हैं । जबकि झारखंड के प्रतिभावान युवा डिग्री होने के बाद भी केवल JTET के अभाव में बेरोजगार बैठे हैं ।
- सरकारी स्कूलों में गिरता शिक्षा स्तर: राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में हजारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं । योग्य शिक्षकों की कमी के कारण गरीब बच्चों की शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है ।
भविष्य में होने वाले और बड़े नुकसान (Anticipated Future Damages):
- प्रतियोगिता का अत्यधिक बढ़ना (Hyper-Competition): 2016 से लेकर 2026 तक लगभग 3.5 से 4 लाख नए अभ्यर्थियों ने शिक्षण डिग्रियां ली हैं । जब भी भविष्य में मुख्य बहाली होगी, तब एक-एक पद के लिए अभूतपूर्व भीड़ होगी, जिससे कट-ऑफ बहुत ज्यादा जाएगा और पास होना बेहद कठिन हो जाएगा ।
- अदालती मामले और भर्तियों का अटकना (Legal Hurdles): परीक्षा नियमों में बार-बार बदलाव और क्षेत्रीय भाषाओं के विवाद के कारण मामला बार-बार कोर्ट में जाता है । भविष्य में भी परीक्षा कानूनी मुकदमों में फंसकर सालों-साल अटकी रह सकती है ।
- CTET पास अभ्यर्थियों के साथ टकराव: कई अभ्यर्थी CTET पास करके राज्य में मौका मांग रहे हैं । JTET न होने से स्थानीय नीति और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के दावों के बीच एक बड़ा सामाजिक और कानूनी टकराव होना तय है, जिससे नियुक्तियां लंबे समय के लिए रुक सकती हैं ।
- छात्रों में भारी मानसिक तनाव और हताशा: सालों तक तैयारी करने और बार-बार फॉर्म भरने व रद्द होने के चक्र के कारण युवाओं में भारी मानसिक अवसाद (Depression) और राज्य की चयन व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़ेगा ।






