घारें हो बिनी,पंखा,एसी,कूलर साभे हो खलि नांव के? बिजली-लाइन रहबे नांय करतो ताब ई साब हो कोन...
साहित्य
लेखक – प्रेमचंदखोरठा अनुवाद – अम्बुज कुमार ‘अम्बुज ‘ रमजानेक पुरा तीस रोजाक बादें ईद आइल हे...
पढ़ाइ छउवे घरी लेल पीछातखने ले परेसान हीई कधिया सिरयतयओकरे आसे लागल ही । कतेक दिन से...
खोरठा कविताहाम मासटर लागी हाम मासटर लागी, मकिन इ मत सोच,छउवा के सिखवे ब इठल हिहाम डाक...
मिटे नायं दिहा माटिक मान जखन हाम होसेक दुनियाएंडेग राखल हलोंतखनी से तोर नारा, पोस्टर बैनरमीटिंग सिटिंग...
मानुसे मानुस के मारे लागल मानुस आर मानुस नायं रहलमानुसे, मानुस के मारे लागलधन दौलतेंक पेछुएँ भेल...
रे झारखंडी रे झारखंडी, कते निंदाइल हेंएखनो त नजइर खोल !हियांक माञ माटी आर भासाकऊपर संकट !ताव...
भाखा हाम लागी भाखा, भाखाक मान जोगाय राखाहामर नजइर चाइरो दन, तनी ओनाय के देखा।ओहाइर कइर के...
मानुसेक सक्ति हे मानुस! बुझ नाञ् –तोंञ् आपन के हीन,उठ–उठ,जाग–जाग –आपन के तोंञ् चिन्ह| तोर गातेक आइगे...
ओझाक (सोखाक) भेउ हां रे,,, के,, के,, देखले हा –भूत – डाइन ?जो,,जो,, हाम्हूं देखबइ,तनी हांकाइ आन,...
