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परिवहन विभाग मौन, हादसों का जिम्मेदार कौन?
पत्थलगड़ा (चतरा): चतरा जिले के पत्थलगड़ा, गिद्धौर, और सिमरिया थाना क्षेत्रों में कोल वाहनों के बेधड़क परिचालन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सालिमपुर और नवाडीह गांवों के ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर कोल वाहनों को रोक दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि परिवहन विभाग और प्रशासन की लापरवाही के कारण भारी-भरकम कोल वाहनों (हाइवा) का दिन-रात बिना किसी रोक-टोक के परिचालन हो रहा है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों का आरोप: सुरक्षा से खिलवाड़
ग्रामीणों का कहना है कि सालिमपुर से नवाडीह होते हुए सिमरिया जाने वाली सड़क ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरती है, जिसमें एक दर्जन से अधिक गांव हैं। इस सड़क पर रोजाना लगभग 50 भारी कोल वाहन (हाइवा) तेज रफ्तार से गुजरते हैं। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, और आम ग्रामीणों के लिए सड़क पार करना बेहद खतरनाक हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क कोल वाहनों के लिए अधिकृत रूट नहीं है, इसके बावजूद जबरन इस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि परिवहन विभाग और प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं, जिससे उनकी समस्याएं और भी गंभीर होती जा रही हैं।
नवाडीह में वाहनों को रोका गया, सड़क पर प्रदर्शन
गुस्साए ग्रामीणों ने नवाडीह में सड़क पर प्रदर्शन कर कोल वाहनों को रोक दिया। विरोध के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं होगा, वे इस रूट पर कोल वाहनों का परिचालन नहीं होने देंगे।
ग्रामीण रमेश महतो ने कहा,
“हमारे बच्चे स्कूल जाने में डरते हैं। रोज हादसे का डर बना रहता है। यह सड़क कोल वाहनों के लिए नहीं है, फिर भी जबरदस्ती इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।”
वहीं, सरस्वती देवी, जो एक स्थानीय निवासी हैं, ने बताया कि,
“गांव के बीच से गुजरती इन भारी गाड़ियों के कारण धूल और प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेना मुश्किल हो गया है।”
परिवहन विभाग की चुप्पी पर सवाल
बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और परिवहन विभाग इस गंभीर समस्या पर अब तक क्यों चुप है? ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी इन हालातों से वाकिफ होने के बावजूद कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
हादसों की आशंका बढ़ी
ग्रामीणों का डर सिर्फ प्रदूषण या ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं है। सड़क के खराब हालात और तेज रफ्तार हाइवा के चलते किसी बड़े दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं.
ग्रामीणों की मांगें:
- कोल वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट की व्यवस्था की जाए।
- ग्रामीण सड़कों से भारी वाहनों का परिचालन तत्काल बंद किया जाए।
- सुरक्षा के लिहाज से स्कूल के समय वाहनों के परिचालन पर रोक लगे।
- सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
प्रशासन का जवाब कब?
ग्रामीणों का यह विरोध प्रशासन के लिए एक बड़ा संकेत है कि समस्या गंभीर है। सवाल उठता है कि आखिर हादसे के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
अब देखना यह है कि परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मुद्दे पर कब और क्या कदम उठाते हैं।







