लेखक एवं फिल्मकार संजय भारती के नए हिंदी उपन्यास ‘पाप और प्रतिशोध’ का विमोचन 30 अक्टूबर 2026 को फिल्म डिवीजन के सभागार, नई दिल्ली में किया गया। इस उपन्यास का प्रकाशन प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान प्रभात प्रकाशन (Prabhat Prakashan) द्वारा किया गया है। पुस्तक का विमोचन दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) के संस्थापक एवं वरिष्ठ फिल्म विश्लेषक श्री राम किशोर परचा ने किया।
उल्लेखनीय है कि फिल्म डिवीजन के सभागार में इन दिनों प्रथम दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) चाइनीज फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसी फिल्म महोत्सव के दौरान आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम ने साहित्य और सिनेमा के बीच एक खूबसूरत सेतु का काम किया।
आत्मग्लानि से आक्रोश तक… अब कहानी प्रतिशोध की!
‘पाप और प्रतिशोध’ लेखक संजय भारती के पूर्व प्रकाशित उपन्यास ‘पाप और प्रायश्चित्त’ का दूसरा भाग है। जहां पहले उपन्यास की कहानी आत्मग्लानि, पश्चाताप और लाचारी के इर्द-गिर्द घूमती थी, वहीं इसकी अगली कड़ी आक्रोश, गुस्से, संघर्ष और बगावत की कहानी को सामने लाती है।
जब पीड़ित की चीखें समाज के बहरे कानों तक नहीं पहुंच पातीं और व्यवस्था से न्याय मिलने की सारी उम्मीदें दम तोड़ देती हैं, तब इंसान के भीतर प्रतिशोध की भावना जन्म लेती है। यही इस उपन्यास का मूल भाव और केंद्रीय संघर्ष है।
इसके पात्र केवल परिस्थितियों को सहने वाले किरदार नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था और रूढ़िवादी मान्यताओं पर सीधे सवाल उठाने वाले बागी चरित्र हैं। लेखक ने पाठकों को उपदेश देने के बजाय उन्हें नैतिकता के ऐसे कठघरे में खड़ा किया है, जहां यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब न्याय नहीं मिलता, तब लिया गया प्रतिशोध कितना जायज है?
एक उपन्यास, जो पढ़ते हुए फिल्म जैसा अनुभव कराए
‘पाप और प्रतिशोध’ एक कमर्शियल हिंदी फिक्शन नॉवेल है, जिसमें रोमांच, रहस्य, भावनाएं, नाटकीय घटनाक्रम और मजबूत किरदारों का समावेश है। इसकी दृश्यात्मक लेखन शैली पाठकों को कहानी से इस तरह जोड़ती है कि घटनाएं उनके सामने घटित होती हुई महसूस होती हैं।
लेखक एवं फिल्मकार संजय भारती की फिल्म निर्माण और निर्देशन की पृष्ठभूमि का प्रभाव उपन्यास की कहानी कहने की शैली में स्पष्ट दिखाई देता है। कहानी में फीचर फिल्म और वेब सीरीज के रूपांतरण की संभावनाएं भी मौजूद हैं। यह कृति विशेष रूप से उन पाठकों को आकर्षित कर सकती है, जिन्हें रोमांचक, मनोरंजक और सिनेमाई अंदाज में लिखी गई कहानियां पसंद हैं।
तीन भागों में आगे बढ़ेगी कहानी
‘पाप और प्रतिशोध’ एक प्रस्तावित त्रयी (ट्रिलॉजी) की दूसरी कड़ी है। इस श्रृंखला का पहला भाग ‘पाप और प्रायश्चित्त’ था, जबकि तीसरे भाग में कहानी और उसके किरदारों की यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह लेखक ने एक ऐसी कहानी की कल्पना की है, जो तीन उपन्यासों के माध्यम से अपने व्यापक कथानक को पूर्णता तक पहुंचाएगी।
साहित्य और सिनेमा से गहरा जुड़ाव
संजय भारती हिंदी लेखक, निर्देशक एवं फिल्मकार हैं तथा दिल्ली स्थित फ्रेमवे प्रोडक्शंस (Framway Productions) के संस्थापक हैं। वह फिक्शन फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और सामाजिक विषयों पर आधारित रचनात्मक परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं।
सिनेमा से उनके रचनात्मक जुड़ाव का प्रभाव उनकी कहानियों में भी दिखाई देता है। दृश्यात्मकता, प्रभावशाली संवाद, नाटकीय परिस्थितियां और मजबूत किरदार उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषताएं हैं। उनका मानना है कि एक अच्छी कहानी केवल पढ़ी नहीं जानी चाहिए, बल्कि पाठक उसे अपने मन में घटित होते हुए महसूस भी कर सके।
‘पाप और प्रतिशोध’ के विमोचन के साथ संजय भारती ने साहित्य और सिनेमा के बीच अपनी रचनात्मक यात्रा का एक नया अध्याय जोड़ा है।


