झारखंड की मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री तृषा सिंह एवं उनके तीन युवा साथियों की दुर्घटना में मृत्यु से कई महत्वपूर्ण सवाल फिर से उठ रहे हैं। यदि इन सवालों की ओर अब भी ध्यान नहीं दिया गया, तो पता नहीं और कितनी ऐसी दुर्घटनाओं में माता-पिता की गोद सूनी होगी।
पहला सवाल है कि इस तरह से ट्रक को खड़ा रखने वाले ट्रक ड्राइवर और मालिक पर कोई कार्रवाई होगी या नहीं? इन पर तो चार मासूमों की हत्या का आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए। इसी तरह रात के अंधेरे में लावारिस हालत में बीच सड़क पर खड़ा ट्रक न जाने कितनी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। झारखंड के किसी भी क्षेत्र में यदि हाईवे पर आप सफर करेंगे तो इस तरह के दो-चार ट्रक आपको दिखेंगे। कुछ के पीछे चमकता हुआ परावर्तक टेप (retro-reflective tape), जिसे बोलचाल की भाषा में रेडियम टेप कहते हैं, वह लगी होती है। कुछ ट्रक चालक और मालिक खतरे को भाँपते हुए ट्रक के पीछे से आने वाले वाहन को सावधान करने के लिए अलग से कुछ उपाय करते हैं। इससे अन्य चालकों को समझ में आ जाता है कि वहां कोई ट्रक खड़ा है। ऐसे लोगों को मेरा सलाम! परंतु कुछ लोगों को इसकी कोई परवाह नहीं होती, जैसा कि इस घटना से जुड़े ट्रक मालिक और ड्राइवर के मामले में दिखा। ज्ञात हो कि रात के समय ड्राइविंग के वक्त जब विपरीत दिशा से किसी वाहन की हेडलाइट चमकती है, तो अंधेरे में खड़ा ट्रक दिखाई नहीं देता और दुर्घटना घट जाती है।
इसी से जुड़ा दूसरा सवाल यह है कि क्या हाईवे पेट्रोलिंग हो रही थी? क्या पेट्रोलिंग पार्टी ने इस ट्रक को नहीं देखा था? यदि पेट्रोलिंग वालों ने ₹50-₹100 लेकर इस ट्रक की अनदेखी की थी, तो आज ऐसे पुलिसवालों पर भी हत्या का आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। क्योंकि यदि वे ट्रक चालक पर एक्शन लेते हुए कम से कम ट्रक के काफी पीछे तक कोई सतर्कता चिह्न रखवा देते, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था। आजकल तो किसी भी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही पता चल जाता है कि गाड़ी किसकी है और उनका फोन नंबर क्या है। ऐसे ट्रकों पर पुलिसिया कार्रवाई होने से ट्रक वाले भी कम से कम अपने पीछे रेडियम पट्टी जरूर लगाने लगेंगे।
तीसरा सवाल यह है कि हमारे राज्य के लोगों की सोच में आज भी ‘खास’ और ‘आम’ के बीच एक बड़ी खाई व्याप्त क्यों है। यह अत्यंत पीड़ादायक है। खबरों और लोगों की प्रतिक्रियाओं को देखें तो स्पष्ट दिखता है कि मंत्री की पुत्री की मृत्यु का दुख लोगों को ज्यादा हुआ। कई व्हाट्सएप ग्रुप में तो केवल मंत्री की पुत्री के प्रति संवेदना संदेश पोस्ट किए गए। इस समाचार के माध्यम से हम वंशिका, तृषा, नमन और सार्थक के प्रति समान रूप से गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सबके माता-पिता एवं परिजनों को इस कठिन स्थिति का सामना करने की शक्ति दें।
याद करें पिछले ही सप्ताह मुंबई के मरीन ड्राइव में भी इसी तरह हमारे दो बच्चों को हमने खोया है। तो अंतिम सवाल स्वयं से ही है। हम कैसे माता-पिता बनते जा रहे हैं ? अपने बच्चों को कितना समय और क्या संस्कार दे रहे हैं ? इतनी कम उम्र में, इतनी रात को, इतनी तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने जैसे सवालों को गंभीरता से लेना होगा। अब भी यह सवाल अपने आप से नहीं करेंगे तो भविष्य में इस तरह के और धक्के हमें सहने पड़ेंगे।
