विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के हिंदी विभाग में सोमवार को विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. केदार सिंह के अवकाश ग्रहण सह विदाई समारोह का भावपूर्ण आयोजन किया गया। अपने संबोधन में डॉ केदार सिंह ने कहा कि वह आज भी अपने को एक विद्यार्थी मानते हैं और अध्ययन करते हैं। कहा कि जीवन पर्यंत अध्ययन करने वाला व्यक्ति ही सही में शिक्षक होते हैं। उन्होंने अपने शिक्षक जीवन के सफल निर्वहन के लिए अपने माता-पिता, सहयोगियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात हिंदी विभाग की छात्राओं ने मनोहारी गणेश वंदना एवं नृत्य प्रस्तुत कर समारोह को मंगलमय वातावरण प्रदान किया।
समारोह में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध सिंह ‘शिवगीत’, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज कुमार, डॉ. कृष्ण कुमार गुप्ता, संकायाध्यक्ष डॉ. सैयद जैन-उल-हक़, विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनील दूबे एवं डॉ. राजू राम, डॉ. विनोद रंजन, भूगोल विभाग के डॉ. सरोज सिंह, पूर्व प्राध्यापक वासुदेव नंदन प्रसाद सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे।
डॉ. केदार सिंह के गुरु प्रो. डॉ. नागेश्वर सिंह ने अपने शिष्य के प्रति भावपूर्ण उद्गार व्यक्त करते हुए कहा—“ऐसा शिष्य पाकर मैं धन्य हुआ।”
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “हिंदी विभाग का यह सौभाग्य है कि डॉ. केदार सिंह जैसे शिक्षक इस विभाग का हिस्सा रहे हैं।” उन्होंने डॉ. केदार सिंह के अकादमिक योगदान और विभाग के प्रति उनकी सेवाओं को स्मरण करते हुए उनके भावी जीवन के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
समारोह में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अपने प्रिय शिक्षक के साथ बिताए अनुभवों और संस्मरणों को साझा किया। किसी ने उनके अध्यापन की सरलता को याद किया, तो किसी ने उनके स्नेह, अनुशासन और मार्गदर्शन को। सहकर्मियों एवं मित्रों ने भी अपने-अपने संस्मरणों के माध्यम से डॉ. केदार सिंह के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को रेखांकित किया। इस दौरान अनेक वक्ताओं की स्मृतियाँ भावुक कर देने वाली रहीं।
कार्यक्रम में डॉ. केदार सिंह की पत्नी श्रीमती सरिता सिंह, उनके भ्राता श्री अवधेश सिंह, पुत्र तथा परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। विदाई के इस अवसर पर अपने प्रिय शिक्षक के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें भावनाओं से भरे उपहार भेंट किए। एक से एक पुष्प स्तबक भेंट किए गए।
विभागाध्यक्ष डॉ सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. केदार सिंह की विदाई एक अध्याय का समापन नहीं, बल्कि स्मृतियों के एक नए अध्याय का आरंभ हो रहा हो। शिक्षक का अवकाश केवल सेवा से होता है, विद्यार्थियों और सहकर्मियों की स्मृतियों से नहीं। कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनील दूबे ने किया।




